वाराणसी विकास प्राधिकरण

 

वाराणसी विकास प्राधिकरण

भूमिका-

गंगा नदी के किनारे पर 'वरुणा से अस्सी' (घाट) के मध्य लगभग 6.0 किलोमीटर लम्बे गंगा के पश्चिम तटीय क्षेत्र में बसी वाराणसी नगरी विश्व के प्राचीनतम नगरो में से एक है. इसका इतिहास 3000 वर्ष से भी पुराना है. प्राचीनतम भारतीय ग्रंथो में वाराणसी नगर का वर्णन बाबा विश्वनाथ की पावन मोक्षदात्री नगरी एवं तीर्थस्थल के रूप में है. अनेको तीर्थ यात्री नगर के धार्मिक स्वरुप के प्रति अपने श्रद्धा भाव से इस तीर्थ स्थान के दर्शनार्थ, गंगा स्नान, अपने दुष्कर्मो का प्रायश्चित कर अपनी आत्मा को पवित्र करने की धार्मिक भावना एवं जीवन के अंतिम सोपान में दैहिक काया को पञ्च-तत्व में विलीन करने के उद्देश्य से आते है. यह दिल्ली तथा कोलकाता के रास्ते पर लगभग मध्य में स्थित है.

वाराणसी महायोजना का संक्षिप्त परिचय-

वाराणसी नगर की प्रथम महायोजना वर्ष 1948 में इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट सीमा के लिए सर्वप्रथम मिस्टर डडले ट्रेगेड द्वारा बनाई गयी थी. पुनः दिसम्बर, 1958 में वाराणसी विनियमित क्षेत्र की घोषणा की गयी तथा शासन के निर्देशानुसार नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग द्वारा महायोजना तैयार की गयी तथा जिसे शासन द्वारा अक्टूबर, 1973 में स्वीकृति प्रदान की गयी. अगस्त, 1974 में वाराणसी विकास क्षेत्र की स्थापना की गयी. प्राधिकरण ने अपनी बैठक दिनांक 16 दिसम्बर, 1974 के संकल्प संख्या-3 के अनुसार शासन से पूर्व में स्वीकृत महायोजना को अंगीकृत किया गया एवं वाराणसी विकास प्राधिकरण द्वारा विकास नियंत्रण का कार्य वर्ष 1974 से प्रारंभ किया गया.


Tender

वाराणसी विकास प्राधिकरण के सभी टेंडर https://etender.up.nic.in पर देखे जा सकते हैं Read More